Dhanvantari Brass Idol – 7.5 Inch (Amrit Kalash, Ayurveda Devta)
Dhanvantari Brass Idol — आयुर्वेद के देव, समुद्र मंथन से प्रकट
Dhanvantari 7.5 इंच brass मूर्ति भगवान विष्णु के अवतार और आयुर्वेद के जनक की प्रतिमा है। समुद्र मंथन की कथा में जब देव और असुर ने क्षीर सागर का मंथन किया, तब चौदह रत्नों के अंत में Dhanvantari भगवान अमृत कलश लेकर प्रकट हुए। यह कलश जीवन, healing और immortality का प्रतीक है।
इस idol को घर के mandir, doctor's clinic, Ayurveda centre या healing space में स्थापित करना आरोग्य, मानसिक शांति और स्थिर ऊर्जा प्रवाह को support करता है। Dhanteras (Diwali का पहला दिन) पर Dhanvantari का पूजन विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
Solid brass (पीतल) में sand-cast, हाथ से उकेरी गई बारीक नक्काशी और antique golden polish के साथ — यह मूर्ति लंबे समय तक टिकाऊ है और premium look देती है। Height 7.5 inch, base 4 inch, वजन 1,125 grams।
Placement: East या North-East दिशा में रखें। साफ wooden/marble platform पर रखें — सीधे ज़मीन पर नहीं। Wednesdays को छोटा कलश में जल अर्पित करें।
Note: यह guidance-based vastu/spiritual product है। यह कोई medical दवा या treatment नहीं है। परिणाम व्यक्ति की स्थिति, सही दिशा-निर्धारण और नियमित पालन पर depend करते हैं।
Keywords: Dhanvantari idol, Dhanvantari brass murti, आयुर्वेद के देवता, Amrit Kalash idol, Vastu idol, Dhanteras gift, doctor clinic gift, healing symbol, brass statue।
Highlights
- Solid brass में 7.5 इंच (19 cm) ऊँची, weight 1125 g — substantial और premium feel
- Hand-cast और hand-engraved finishing — हर मूर्ति में बारीक डिटेल
- अमृत कलश, चार भुजाएँ और radiant prabhamandala (halo) के साथ authentic Vedic iconography
- आयुर्वेद के देव — doctor's clinic, hospital, Ayurveda centre के लिए अत्यंत शुभ
- Dhanteras, clinic opening और गृह प्रवेश पर meaningful gift
- Ready for puja — कोई विशेष consecration आवश्यक नहीं (वैकल्पिक प्राण-प्रतिष्ठा कर सकते हैं)
Why this product
यदि आप घर, clinic या workspace में health, healing और स्थिर positive energy चाहते हैं, तो Dhanvantari brass idol एक powerful Vedic symbol है। यह केवल decor नहीं — यह रोज़ का reminder है कि स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है। Solid brass की premium quality, authentic iconography और Dhanteras-शुभ इसे एक meaningful long-term investment बनाते हैं।
Customer story
<p><strong>समुद्र मंथन की कथा:</strong> देव और असुर ने मिलकर क्षीर सागर का मंथन किया — मन्दार पर्वत मथानी और वासुकि नाग रस्सी बने। मंथन के दौरान चौदह दिव्य रत्न प्रकट हुए। अंत में, चमकते हुए हाथों में स्वर्ण कलश लिए, <strong>भगवान धन्वंतरि</strong> सागर से उभरे — यह कलश <em>अमृत</em> का था, जो अमरत्व, healing और जीवन-शक्ति का प्रतीक है।</p><p>धन्वंतरि भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं, और वे <strong>आयुर्वेद के जनक</strong> हैं — जीवन के सनातन विज्ञान के पिता। उनके प्रकट होने का दिन <strong>धनतेरस</strong> (दीवाली का पहला दिन) के रूप में मनाया जाता है — जब लोग सोना, चाँदी, पीतल और नए बर्तन ख़रीदते हैं और स्वास्थ्य-समृद्धि की कामना करते हैं।</p><p>इस मूर्ति की चार भुजाएँ चारों दिशाओं और चारों वेदों पर अधिकार दर्शाती हैं। एक हाथ में <strong>अमृत कलश</strong>, दूसरे में <em>शंख</em> (सृष्टि की पवित्र ध्वनि), तीसरे में <em>सुदर्शन चक्र</em> (रोग और भय का नाश), और चौथे में <em>औषधि</em> (आयुर्वेद की मूल जड़ी-बूटियाँ)। पीछे radiant <em>प्रभामंडल</em> उनकी दिव्य उपस्थिति का प्रतीक है।</p>