सम्पूर्ण कैरियर वास्तु संचय / Complete Career Vastu Collection — 7 Devtas + 4 Idols + 2 Tatva Rods

सम्पूर्ण कैरियर वास्तु संचय / Complete Career Vastu Collection — 7 Devtas + 4 Idols + 2 Tatva Rods

Rs. 19,999.00
Sale price  Rs. 19,999.00 Regular price  Rs. 37,500.00
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सम्पूर्ण कैरियर वास्तु संचय / Complete Career Vastu Collection — 7 Devtas + 4 Idols + 2 Tatva Rods

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सम्पूर्ण कैरियर वास्तु संचय — एक ही सङ्ग्रह में सात देवता, चार प्रतिमाएँ, दो तत्त्व-छड़ें

कैरियर में प्रगति केवल किसी एक दिशा या एक उपाय से नहीं आती। यह विशेष सङ्ग्रह वास्तु-पुरुष-मण्डल के सात विभिन्न क्षेत्रों, चार महत्वपूर्ण प्रतिमाओं, तथा दो तत्त्व-छड़ों को एक साथ संयोजित करता है। साथ ही श्रीमद्भगवद्गीता के चुनिन्दा अध्यायों का स्वाध्याय आन्तरिक शुद्धि का माध्यम बनता है।

✦ सात कैरियर देवता

  • Mahendra (E4) — प्रबन्धन-क्षमता व नेतृत्व-तेज
  • Jayant (E3) — कठिन परिस्थितियों में विजय
  • Surya (E5) — तेजस्विता, मान-प्रतिष्ठा
  • Bhrisha (E7) — निरन्तर परिश्रम का फल
  • Mitra (W) — सहयोगियों का साथ, कौशल-स्थिरता
  • Soma (N5) — शीतल मस्तिष्क से निर्णय
  • Savitra (SE) — कार्यारम्भ की प्रखरता

✦ चार वास्तु-प्रतिमाएँ

  • Indra Dev 5.5" Brass — कार्यालय की मेज पर नेतृत्व-तेज हेतु
  • Garuda — तीव्र दृष्टि व कार्य में स्वच्छता हेतु
  • Vastu Compass — कार्यालय की दिशा निर्धारण हेतु यन्त्र
  • Ashoka Pillar 10" — गौरव व नेतृत्व का सनातन प्रतीक

✦ दो तत्त्व-छड़ें

  • Copper Rod 12mm × 12" — ताम्र तत्त्व ऊर्जा को संकेन्द्रित करता है
  • Brass Rod 12mm × 12" — पीतल तत्त्व कम्पन को संतुलित रखता है

🪔 सहायक स्वाध्याय — Read chapters from Gita

इस सङ्ग्रह की साधना के साथ श्रीमद्भगवद्गीता के निम्न अध्यायों का अध्ययन अत्यन्त लाभकारी है:

  • अध्याय २ (साङ्ख्य-योग व कर्मयोग का सार)कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन — कार्य-चिन्ता का परम निवारण
  • अध्याय ३ (कर्मयोग का विस्तार) — निष्क्रियता त्याग कर निरन्तर कर्म में संलग्न रहने का सन्देश
  • अध्याय ६ (ध्यान-योग) — निर्णय लेने से पूर्व चित्त-शान्ति प्राप्त करने हेतु
  • अध्याय १८ (मोक्ष-सन्न्यास-योग) — स्वधर्म-कार्य में निरत रहकर सिद्धि प्राप्त करने का मार्ग

इन अध्यायों का पाठ आप अपनी सुविधानुसार किसी भी विश्वसनीय गीता-संस्करण से कर सकते हैं — गीता प्रेस गोरखपुर का संस्करण सर्वत्र उपलब्ध है।

📐 तकनीकी विवरण

  • कुल वस्तुएँ: 13 (7 देवता + 4 प्रतिमा + 2 छड़ें)
  • देवता-धातु: उच्च-गुणवत्ता वाला पीतल, 12cm × 12cm × 4cm
  • प्रतिमा-धातु: पीतल व मिश्रित तत्त्व
  • छड़ें: 12mm व्यास × 12 इञ्च लम्बाई
  • शुभ संस्थापन-दिन: बुधवार अथवा बृहस्पतिवार, सूर्योदय के एक घण्टे पश्चात्
  • व्यक्तिगत स्थान-निर्देशन: कृपया अपने भवन का मानचित्र WhatsApp पर प्रेषित करें — विश्लेषण निःशुल्क

यह सङ्ग्रह तत्काल चमत्कार का दावा नहीं करता। यह तीन से छह मास के निरन्तर अभ्यास का साधन है — जो साधक नित्य 11 मिनट का संक्षिप्त उपासना-क्रम अपनाते हैं, उन्हें क्रमशः परिणाम परिलक्षित होते हैं।

Highlights

  • 📈 7 Career-focused Devtas (Mahendra · Jayant · Surya · Bhrisha · Mitra · Soma · Savitra) / सात कैरियर-केन्द्रित देवता
  • 🏛️ 4 Vastu Idols — placed per Astrology Box (Nakshatra Kosht) / चार वास्तु-प्रतिमाएँ — ज्योतिष-कोष्ठ अनुसार स्थापन
  • 🔱 2 Tatva Rods (Copper + Brass) for workspace / दो तत्त्व-छड़ें — कार्य-स्थल हेतु
  • 🪔 Recommended: Read Bhagavad Gita chapters 2, 3, 6, 18 / गीता के चयनित अध्यायों का स्वाध्याय
  • 💰 Save ₹6,160 vs individual purchase / पृथक्-क्रय की तुलना में ₹6,160 की बचत
  • 📖 Installation guide with every item / प्रत्येक वस्तु के साथ संस्थापन-विधि
  • 📞 Free personalized guidance — WhatsApp +91 97704 40000 / निःशुल्क व्यक्तिगत मार्गदर्शन

Why this product

एक-एक करके यह वस्तुएँ ख़रीदने पर ₹26,159 का व्यय होता है। इस सङ्ग्रह में ₹19,999 की मूल्य पर सब कुछ एक साथ — ₹6,160 की प्रत्यक्ष बचत। साथ-ही, सङ्ग्रह-संस्थापन से प्राप्त होने वाला सम्मिलित प्रभाव पृथक् वस्तुओं से कहीं अधिक होता है — जैसे एकल यन्त्र की तुलना में सम्पूर्ण मन्दिर का प्रभाव। यह तीन से छह मास के नियमित साधना-क्रम का आरम्भ-बिन्दु है।

Customer story

कैरियर में प्रगति एक बहु-आयामी विषय है। केवल नेतृत्व पर्याप्त नहीं, केवल कौशल पर्याप्त नहीं, केवल विवेक भी पर्याप्त नहीं — इन समस्त गुणों का समन्वय आवश्यक है। यह सङ्ग्रह सात पृथक् क्षेत्रों के देवताओं, चार स्थान-विशेष प्रतिमाओं, तथा दो तत्त्व-छड़ों को एक साथ संयोजित करता है। साथ ही — हम परम्परा का आदर करते हुए श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय २, ३, ६ व १८ के स्वाध्याय की संस्तुति करते हैं। यह केवल भौतिक उपायों का संचय नहीं, अपितु एक सम्पूर्ण साधना-मार्ग है।

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